कलार समाज के बारे में जानकारी

कलार समाज (जिन्हें कलवार, कलाल या जायसवाल समाज के नाम से भी जाना जाता है) भारत का एक प्राचीन और ऐतिहासिक व्यावसायिक व सामाजिक समुदाय है। यह समाज मुख्य रूप से उत्तर, मध्य और पूर्वी भारत (उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान, गुजरात, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र आदि) में विस्तृत है। ​उत्पत्ति और पौराणिक संदर्भ ​कलार समाज अपनी उत्पत्ति पौराणिक रूप से भगवान सहस्रार्जुन (कार्तवीर्य अर्जुन) या भगवान शिव से जुड़े आख्यानों से जोड़ता है। कुछ मान्यताओं में इन्हें सूर्यवंशी या चंद्रवंशी क्षत्रिय परंपरा से संबंधित माना गया है। ऐतिहासिक दृष्टि से, शब्द 'कलाल' या 'कलवार' संस्कृत शब्द कल्यपाल (औषधि या पेय पदार्थों के निर्माण व संरक्षण से जुड़े व्यक्ति) से व्युत्पन्न माना जाता है। ​ऐतिहासिक व्यवसाय ​पारंपरिक कार्य: प्राचीन और मध्यकाल में इस समुदाय के लोग मुख्य रूप से प्राकृतिक जड़ी-बूटियों, आसवन (distillation) और औषधीय पेयों के निर्माण व व्यापार से जुड़े थे। ​व्यापारिक बदलाव: 19वीं और 20वीं सदी के दौरान, ब्रिटिश शासन की नई आबकारी नीतियों और बदलते सामाजिक परिवेश के कारण समाज के अधिकांश लोगों ने इस काम को छोड़ दिया। इसके बाद वे सामान्य किराना व्यापार, कृषि, कपड़ा व्यापार और निर्माण उद्योग जैसे क्षेत्रों में पूरी तरह स्थापित हो गए। ​उप-शाखाएं और प्रमुख उपनाम ​कलार समाज कई उप-वर्गों और उपनामों में विभाजित है, जिनमें प्रमुख हैं: ​जायसवाल: उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान और मध्य प्रदेश में बड़ी संख्या में लोग 'जायसवाल' उपनाम का उपयोग करते हैं। ​ब्याहुत, सेहरावत और डडसेना: बिहार, झारखंड और छत्तीसगढ़ के क्षेत्रों में पाई जाने वाली प्रमुख उप-जातियां। ​प्रयुक्त उपनाम: जायसवाल, कलवार, कलाल, राय, चौधरी, साहू, महाजन, भगत और वर्मा। ​सामाजिक एवं आर्थिक स्थिति ​व्यापार और उद्यम: कलार समाज को एक मेहनती और व्यापार-कुशल समाज माना जाता है। अनाज, हार्डवेयर, रियल एस्टेट और खुदरा व्यापार में इस समाज की मजबूत उपस्थिति है। ​शिक्षा और सरकारी सेवाएं: आधुनिक समय में शिक्षा के प्रसार के साथ समाज की युवा पीढ़ी उच्च शिक्षा, प्रशासनिक सेवाओं (UPSC/State PSC), चिकित्सा, इंजीनियरिंग और कॉर्पोरेट सेक्टर में भी आगे बढ़ रही है। ​राजनीति: स्थानीय स्तर से लेकर राज्य स्तर की राजनीति में समाज के प्रतिनिधि अपनी भूमिका निभाते रहे हैं। ​धार्मिक व सांस्कृतिक परंपराएं ​कलार समाज सनातन (हिंदू) परंपरा के सभी प्रमुख त्योहार जैसे दीपावली, होली, दशहरा और छठ पूजा धूमधाम से मनाता है। ​अधिकांश क्षेत्रों में समाज सहस्रार्जुन जयंती और भगवान चित्रगुप्त/बलराम से जुड़े पर्वों को विशेष रूप से संगठित होकर मनाता है। ​सामाजिक स्तर पर दहेज प्रथा के निवारण, सामूहिक विवाह और युवा शिक्षा प्रोत्साहन के लिए विभिन्न प्रांतीय 'कलार/जायसवाल महासभाएं' सक्रिय हैं।